Translate

Saturday, July 29, 1995

ईशवर

क्या है यह शब्द?
सिर्फ हमारे मन का डर?
जो न तो कभी दिखाई देता है और
न ही कभी सुनाई |
फिर क्यों, क्यों लोग इसका नाम लेते हैं,
इसकी मूर्ती बनाते हैं, 
इसकी पूजा करते हैं, 
कोई जान पाया है क्या अभी तक?

क्यों लोग भगवन को तो प्रसाद चढ़ाते हैं, और
गरीबों को दो वक़्त की रोटी नहीं?    
क्यों लोग मंदिर बनाते हैं और
गरीबों का घर नहीं?
क्या हमने शास्त्रों मैं नहीं पढ़ा कि
गरीबों की मदद करना भगवान की मदद करना है?
फिर क्या अजीवित के लिए घर बनाकर 
जीवित को मरता छोड़ सही है?

क्यों लोग दुःख में इनका नाम लेते हैं
और सुख में भूल जाते हैं?
यह कैसा अनोखा बहाना है
जो मन को शक्ति और शान्ति देता है?

और जो है नहीं उसके लिए क्यों हो जाते हैं लोग 
मर-मिटने को तैयार?
क्यों लड़ते हैं लोग अपने धर्म को लेकर,   
क्या उनके ईशवर ने कहा था यह?
और क्या सरे धर्मों की एक ही शिक्षा नहीं है?

"हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई | "
कितना अच्छा लगता है सुनकर |
किन्तु इस वाक्य का पालन
किया है क्या किसीने?

मरने के बाद-
एक तरफ लोग 'स्वर्ग और नर्क' की बात करते हैं,
जो न जाने कहाँ है, और
दूसरी तरफ पुनःजन्म की
और कभी तोह भूत बनने की |
विशवास किया भी जाये तो किसका?
इस ईशवर की भी अजीब ही दास्तान है |

Friday, July 28, 1995

टाइम यानिकी समय

एक ऐसी अनोखी चीज
जो सबके पास होते हुए भी नहीं है |
पुरे संसार की बस यही तो समस्या है |
कभी किसी ने, किसी को कहते सुना है क्या,
कि हमारे पास समय है?

काम न करने पर
सभी समय को कोसते हैं |
बेचारा समय 
सबको इतना देता है
फिर भी कोई खुश नहीं होता इससे |

आखिर क्यों?
सबका दुश्मन है
ये समय?
पास होते हुए भी हमारे पास नहीं रहता |

पर अब कोई करे भी तो क्या?
हम तो क्या
पुलिस भी नहीं पकड़पाती इसे |

यह कैसा दोस्त
और कैसा दुश्मन है |
दुश्मन तब जब हमारे पास नहीं रहता
और
दोस्त तब जब काम न करने कर
इल्जाम अपने ऊपर ले लेता है |
दोस्त बनाया है तो दुश्मन क्यों और
दुश्मन है तो दोस्त क्यों?

इस समय कि लीला भी कोई समझ पाया है क्या?
ये समय भी किसी कि बात सुनता है?
जब दुःख और चिन्ता होती है तोह रुक जाता है
और
जब सुख और आनन्द आता है तो भागता है यह |


  

Thursday, July 6, 1995

Charlie O' Charlie

 Charlie O' Charlie, what great Charlie!

He acted and we were happy.

Thanks! Thanks! Thanks to Charlie!

He raffled and he baffled,

He joked and 

He fooled his enemies in the silent movies.

With his moustache and hat,

With his peculiar walk and stick,

He always tried to make us laugh, 

He always tried to make us happy.

And all for it,

Those billions of laughs and smiles

Go to him

As he's the happiness of our heart.

Thanks! Thanks! Thanks to Charlie!

Thank God for sending Charlie.


06/07/95

Dedicated to Charlie Chaplin